शनि व्रत कथा

एक बार सभी नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — इस बात पर आपस में झगड़ने लगे कि सबसे बड़ा ग्रह कौन है। जब कोई समाधान नहीं निकला तो वे देवराज इंद्र के पास गए। इंद्र ने न्याय करने से मना कर दिया और उन्हें पृथ्वी पर राजा विक्रमादित्य के पास भेजा।

राजा विक्रमादित्य ने सभी ग्रहों के लिए अलग-अलग धातुओं से सिंहासन बनवाए। शनि देव को सबसे अंतिम और साधारण लौह सिंहासन मिला। इससे वे सबसे छोटे घोषित हुए। शनि देव को यह अपमान सहन नहीं हुआ और उन्होंने राजा को चेतावनी दी कि वह उनके क्रोध का फल भुगतेंगे।

शनि की साढ़े साती और राजा की कठिन परीक्षा

कुछ समय बाद राजा पर शनि की साढ़े साती शुरू हुई। शनि देव घोड़े के व्यापारी बनकर आए। राजा ने एक घोड़े पर सवारी की, जो उसे घने जंगल में ले जाकर गायब हो गया। राजा वहाँ अकेले, भूखे-प्यासे भटकता रहा।

एक ग्वाले की मदद से राजा ने थोड़ा पानी पिया और आगे एक नगर पहुंचा, जहाँ वह “वीका” नाम से जाना गया। वहाँ एक सेठ ने उसे आश्रय दिया, पर उसके घर से हार गायब हो गया। राजा पर चोरी का आरोप लगा और नगर के राजा ने उसके हाथ-पैर कटवा दिए।

एक तेली को राजा पर दया आई और उसने उसे गाड़ी में बैठाया। राजा अपनी जीभ से बैल हांकने का काम करने लगा। शनिदेव की दशा समाप्त हुई और राजा फिर से संगीत गाने लगा।

राजकुमारी मनभावनी को राजा का गाना इतना पसंद आया कि उसने उसी से विवाह करने का संकल्प लिया। अंततः उसका विवाह उस अपाहिज “वीका” से हो गया।

शनिदेव के दर्शन और कृपा

एक दिन शनिदेव ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि यह सब उनके अपमान का फल था। राजा ने उनसे क्षमा मांगी। शनिदेव ने प्रसन्न होकर राजा के कटे हुए हाथ-पैर वापस कर दिए।

सुबह जब रानी ने देखा तो हैरान रह गई। राजा ने उसे अपनी असली पहचान बताई कि वह उज्जैन के राजा विक्रमादित्य हैं। सब लोग बहुत प्रसन्न हुए। सेठ ने क्षमा मांगी और राजा से अपनी बेटी श्रीकंवरी से विवाह करने का आग्रह किया, जिसे राजा ने स्वीकार कर लिया।

राजा की वापसी और शनि देव की महिमा की घोषणा

राजा विक्रमादित्य अपनी दोनों रानियों के साथ उज्जैन लौटे। नगरवासियों ने भव्य स्वागत किया। राजा ने यह घोषणा की कि शनि देव सबसे महान हैं और उनके व्रत व पूजा से सभी दुख दूर होते हैं।
इस लेख में
    Add a header to begin generating the table of contents
    इन दिस आर्ट
      Add a header to begin generating the table of contents

      लेटेस्ट पोस्ट

      लेटेस्ट न्यूज़

      वेब स्टोरीज

      himachal richest temple himachal pradesh
      हिमाचल के वो मंदिर जहाँ राक्षसों का हुआ था वध #AncientIndia

      वेब स्टोरीज

      himachal richest temple himachal pradesh
      हिमाचल के वो मंदिर जहाँ राक्षसों का हुआ था वध #AncientIndia

      वेब स्टोरीज