क्या आपने कभी सोचा है कि पुराने समय के लोग इतने ताकतवर और लंबे क्यों थे, और आज हम उनसे इतने अलग क्यों हो गए हैं?
यह बदलाव हमारे युगों के साथ-साथ हमारे शरीर में भी परिलक्षित होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, समय को चार युगों में बांटा गया है – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग। वर्तमान में हम कलियुग में जी रहे हैं, जिसे सबसे छोटी अवधि वाला युग माना जाता है। इन चार युगों की यात्रा में, मानव शरीर, उसकी आयु और जीवनशैली में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। हर नए युग के साथ न केवल मनुष्य की जीवन अवधि में कमी आई है, बल्कि उसके शारीरिक आकार और ताकत में भी गिरावट आई है। आज हम इस रोमांचक सफर पर नजर डालेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि सतयुग से कलियुग तक मानव शरीर के आकार और उसकी क्षमताओं में यह बदलाव कैसे और क्यों हुआ।
चार युगों की परिभाषा
सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग – ये चार युग ब्रह्मा जी के एक दिन के हिसाब से बांटे गए हैं। महर्षि व्यास के अनुसार, इन चारों युगों की कुल अवधि देवताओं के बारह हजार दिव्य वर्षों के बराबर होती है, और इन्हें एक महायुग कहा जाता है।
- सतयुग: लगभग 17 लाख 28 हजार साल
- त्रेतायुग: लगभग 12 लाख 96 हजार साल
- द्वापरयुग: लगभग 8 लाख 64 हजार साल
- कलियुग: लगभग 4 लाख 32 हजार साल
हर युग का अपना स्वभाव होता है, जो न केवल इंसान के जीवन पर, बल्कि समग्र संसार पर भी प्रभाव डालता है।
सतयुग: दिव्य और शक्तिशाली मानवता
सतयुग को सत्य और धर्म का युग कहा जाता है। लोग प्रकृति के साथ इतने घुल-मिलकर रहते थे कि उनकी ऊर्जा कभी खत्म नहीं होती थी। पौराणिक ग्रंथों में लिखा है कि सतयुग में मानवों की ऊंचाई लगभग 32 हाथ (48-64 फीट) तक थी। सतयुग में लोग अपनी शुद्धता और दिव्यता से इतने परिपूर्ण थे कि ऋषि-मुनि केवल ध्यान से ही अपने शरीर को स्वस्थ रखते थे।
इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार साल थी और इसे धर्म का युग माना जाता है। इस समय कोई पाप नहीं था और देवी-देवता इंसान के रूप में पृथ्वी पर रहते थे। भगवान विष्णु के मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह जैसे चार अवतार इसी युग में हुए।
त्रेतायुग: शक्ति में गिरावट
अब बारी आई त्रेतायुग की, जहां इंसान थोड़े छोटे और कमजोर हो गए, लेकिन फिर भी वे हमसे कहीं ज्यादा ताकतवर थे। त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार साल थी और इस युग में मनुष्य की ऊंचाई लगभग 16 हाथ (24-32 फीट) थी। आयु लगभग 10,000 साल मानी जाती थी। भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया और रावण का वध किया।
इस युग में पाप का प्रभाव शुरू होने लगा था, लेकिन धर्म अभी भी अधिक बलवान था।
द्वापरयुग: धर्म में और गिरावट
द्वापरयुग में धर्म के दो पाय गिर चुके थे, मतलब सत्य, तप, दया और दान में से अब सिर्फ सत्य और दान ही टिके रहे। इस युग में मनुष्य औसत रूप से 8 हाथ (12-16 फीट) लंबे होते थे और उनकी आयु लगभग 1,000 साल तक होती थी। इस युग में महाभारत जैसा ऐतिहासिक युद्ध हुआ था, और भीम और अर्जुन जैसे महायोद्धा थे, लेकिन आम इंसान अपनी क्षमता और आचरण में कमजोर होते जा रहे थे।
कलियुग: मानवता का अस्तित्व
कलियुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद हुई, जब भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी से अपना देह त्याग किया। कलियुग में मनुष्यों की औसत ऊंचाई घटकर 5-6 फीट रह गई। पहले के युगों में लोग हजारों वर्षों तक जीवित रहते थे, जबकि अब कलियुग में मानव का औसत जीवनकाल मात्र 70-100 वर्ष तक सीमित हो गया है।
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मानव शरीर में बदलाव के पीछे की वजहें
- नैतिकता और आदर्शों का कम होना
सतयुग में धर्म का उच्चतम स्तर था, लेकिन समय के साथ धर्म का ह्रास हुआ और मनुष्य के गुणों में कमी आई। इसके परिणामस्वरूप, शारीरिक और मानसिक रूप से मनुष्य कमजोर होते गए। - कर्मों का प्रभाव
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अच्छे कर्मों के फलस्वरूप मनुष्य सुखी और स्वस्थ रहता है, जबकि बुरे कर्मों के कारण उसे दुःख और रोग का सामना करना पड़ता है। - भोजन का प्रभाव
सतयुग में मनुष्य सात्विक आहार ग्रहण करते थे, लेकिन समय के साथ तामसिक भोजन का सेवन बढ़ता गया, जिससे शारीरिक आकार और शक्ति में गिरावट आई। - कल्प का प्रभाव
हिंदू धर्म में “कल्प” शब्द का विशेष महत्व है, और इसे समय की एक बड़ी और लंबी इकाई के रूप में प्रयोग किया जाता है। हर कल्प के बाद मानव शरीर में परिवर्तन होते गए हैं।
अब क्या?
क्या हम फिर से पहले जैसे बन सकते हैं? शायद पूरी तरह से नहीं, लेकिन कुछ आदतें बदलकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। योग और ध्यान, सात्विक आहार, और प्रकृति के साथ समय बिताकर हम शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।
युग बदलते हैं, समय बदलता है, पर इंसान की आत्मा हमेशा वही रहती है। अगर हम अपने जीवन में धर्म, सत्य और प्रकृति को वापस लाएं, तो शायद फिर से सतयुग की ओर लौट सकते हैं।
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