लेजेंड्स
पौराणिक महानायकों, आध्यात्मिक विभूतियों और ऐतिहासिक चरित्रों की कथाएँ
भारत में ऐसे महानायक हुए हैं, जिनकी गाथाएँ केवल इतिहास नहीं, बल्कि हिंदू माइथोलॉजी की आत्मा बन चुकी हैं। उन्होंने धर्म की रक्षा, पुनर्स्थापना और प्रचार के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। कभी वे युद्धभूमि में अधर्म का नाश करने वाले योद्धा बने, तो कभी संत बनकर समाज को भक्ति, ज्ञान और सदाचार का मार्ग दिखाने लगे। राम, कृष्ण, परशुराम जैसे अवतारी पुरुषों से लेकर वेदव्यास, अगस्त्य, कबीर और मीरा बाई जैसे मनीषी—इन सभी ने भारतीय संस्कृति को आध्यात्मिक गहराई दी और धर्म को युगों तक जीवित रखने का कार्य किया। इनकी लीलाएँ, त्याग और तपस्या की कहानियाँ आज भी हमें हिंदू धर्म के मूल्यों से जोड़ती हैं और आत्मिक प्रेरणा देती हैं।
साथ ही भारत के इतिहास में ऐसे भी मानव नायक हुए हैं, जिन्होंने धर्म, समाज और देश के लिए अपना जीवन बलिदान किया। क्रांतिकारी, समाज सुधारक और राष्ट्रभक्त व्यक्तित्व भी हमारी कथाओं का हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त महाभारत और अन्य ग्रंथों के किरदार न केवल पौराणिक गहराई लिए हुए हैं, बल्कि नैतिक द्वंद्व, राजनीति और जीवन दर्शन का प्रतिबिंब भी प्रस्तुत करते हैं।
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Introduction
ईश्वर रूपी नायक (Divine Legends of Hindu Mythology)
धर्म की स्थापना, अधर्म का विनाश और लोककल्याण का संदेश
भगवान राम – मर्यादा, आदर्श और न्याय के प्रतीक
भगवान कृष्ण – प्रेम, कूटनीति और योग के अधिपति
भगवान नरसिंह – असुरों का विनाश करने वाले अवतार
वामन, परशुराम, मत्स्य, कुर्म, वराह – विष्णु के विभिन्न अवतार
शिव के रूप – जैसे त्रिपुरांतक, अर्धनारीश्वर, भैरव
- भीष्म पितामह – व्रत, त्याग और धर्मनिष्ठा का आदर्श
- कर्ण – दानवीर, योद्धा और जीवन के संघर्ष का प्रतीक
- भीम और अर्जुन – साहस और रणकौशल के प्रतीक पांडव
- घटोत्कच, अंगद, लक्ष्मण – वीरता और निष्ठा के जीवंत रूप
- रावण – ज्ञान और अहंकार का जटिल मिश्रण
जिन्होंने योग, ज्ञान और तप से मानवता को दिशा दी
- वेदव्यास – महाभारत और पुराणों के रचयिता
- वाल्मीकि – रामायण के रचयिता और तपस्वी
- अगस्त्य ऋषि – दक्षिण भारत में वेदों के प्रसारकर्ता
- वशिष्ठ, अत्रि, दुर्वासा, भारद्वाज – वेदों और नीति शास्त्र के ज्ञाता
- महर्षि मार्कण्डेय – अमरता और माँ दुर्गा के उपासक
अभिशप्त, अमर, या रहस्य से घिरे पात्र जिनकी कथाएँ लोकमानस में जीवित हैं
- अश्वत्थामा – अमरता का श्राप और युगों तक भटकती आत्मा
- राजा हरिश्चंद्र – सत्य और धर्म की पराकाष्ठा
- राजा बलि – वामन अवतार के साथ जुड़ा दान और अहंकार का द्वंद्व
- शुक्राचार्य – असुरों के गुरु और अमरता के रहस्य के स्वामी
- त्रिजटा, मंदोदरी, शबरी – सहायक किंतु अत्यंत प्रभावशाली पात्र
इतिहास और समाज के वे योद्धा जिन्होंने युग बदल दिए
- कबीर – समाज सुधार और भक्ति आंदोलन के महान संत
- मीरा बाई – प्रेम, भक्ति और समर्पण की मूर्ति
- तुलसीदास – रामचरितमानस के माध्यम से जनमानस को जोड़ने वाले
- गुरु नानक देव – एकेश्वरवाद और समानता के प्रवर्तक
इनकी गाथाएँ केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज के युग के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
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- हिंदू देवी-देवता
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12 वर्षों में बनकर तैयार – हिमाचल का मोहन शक्ति नेशनल हेरिटेज पार्क
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के हरत गाँव में पहाड़ की तलहटी पर स्थित मोहन शक्ति नेशनल हेरिटेज पार्क (Mohan Shakti National Heritage Park) भारतीय संस्कृति का एक सुंदर प्रतीक है। यह उत्तर भारत (North India) का पहला प्राचीन हेरिटेज पार्क माना जाता है। यह पार्क लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और पहाड़ी की ऊँचाई से नीचे फैली घाटी और हिमालय की तलहटी का बेहद खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है।
shoolini mata mandir : माँ शूलिनी की महिमा, और मंदिर का रहस्यमय इतिहास
शूलिनी माता मंदिर (Shoolini Mata Mandir ) सोलन शहर में शीली मार्ग पर स्थित है। मान्यता है कि शहर का नाम इसी माता शूलिनी के नाम पर पड़ा है, जो सोलन की अधिष्ठात्री देवी हैं। माता शूलिनी को देवी दुर्गा का स्वरूप और भगवान शिव की शक्ति माना जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह क्षेत्र कभी बघाट रियासत की राजधानी हुआ करता था, जिसकी नींव राजा बिजली देव ने रखी थी। बारह घाटों से मिलकर बने इस रियासत का आरंभिक राजधानी जौणाजी हुआ करता था, बाद में कोटी और अंततः सोलन बनी, और राजा दुर्गा सिंह अंतिम शासक थे।
हाटू माता मंदिर : रावण की पत्नी ने कराया था निर्माण, जहाँ आज भी जमीन खोदने पर निकलते हैं कोयले
हाटू माता मंदिर (hatu mata temple) शिमला शहर से लगभग 68 किलोमीटर दूर और नारकंडा से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह …
हिडिंबा देवी मंदिर मनाली: जहाँ होती है चरणचिह्न की पूजा और जो कुल्लू राजपरिवार की दादी मानी जाती हैं।
हिडिंबा देवी (hidimba devi) मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मनाली में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। हिडिंबा माता मंदिर में हर साल …
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