त्योहार
हिंदू धर्म में फेस्टिवल्स (Festivals) परंपराओं को निभाने और भगवान से जुड़ने का एक विशेष माध्यम हैं। प्रत्येक त्योहार का अपना महत्व होता है और उसे विशिष्ट रीति-रिवाज़ों तथा धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
परिचय
हिंदू धर्म में फेस्टिवल्स (Festivals) परंपराओं को निभाने और भगवान से जुड़ने का एक विशेष माध्यम हैं। प्रत्येक त्योहार का अपना महत्व होता है और उसे विशिष्ट रीति-रिवाज़ों तथा धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में सबसे अधिक त्योहार मनाए जाते हैं, और प्रत्येक त्योहार किसी न किसी पौराणिक कथा (Hindu Mythology) से गहराई से जुड़ा होता है।
भारत की सांस्कृतिक विविधता का सार उसके त्योहारों में झलकता है। ये उत्सव सिर्फ सामाजिक मेल‑जोल नहीं, बल्कि Hindu Mythology में वर्णित देवी‑देवताओं और पौराणिक कथाओं से गहरे जुड़े हैं। दीपावली श्रीराम के अयोध्या लौटने, होली प्रह्लाद‑होलिका प्रसंग, और नवरात्रि माँ दुर्गा की महिषासुर विजय को स्मरण कराते हैं। हर पर्व भारतीय मूल्यों, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक शिक्षाओं को जीवंत रखता है, यही इन त्योहारों का स्थायी महत्त्व है।
धार्मिक त्योहार (Religious Festivals - Hindu Mythology)
दिवाली (अधर्म पर धर्म की विजय)
प्रकाश और दीपों का पर्व है। इसे भगवान राम के लंका विजय और अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है। लोग घर-आंगन दीपों से रोशन करते हैं, यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
होली (रंगों का त्यौहार)
बसंत ऋतु में होली का उत्सव मनाया जाता है। यह भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम तथा प्रह्लाद–होलिका की कथा से जुड़ा है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है, और अगले दिन लोग रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंगते हैं।
नवरात्रि/दुर्गा पूजा (माँ दुर्गा की आराधना)
नवरात्रि में देवी दुर्गा की नौ स्वरूपों की पूजा होती है। यह बुराई (महिषासुर) पर देवी की जीत का प्रतीक पर्व है। भक्त दुर्गा की भक्तिपूर्वक पूजा करते हैं और शुभकामनाएँ माँगते हैं।
राम नवमी (भगवान राम का जन्मोत्सव)
चैत्र मास की नवमी को मनाया जाता है, यह भगवान राम के जन्मदिन के रूप में पूजनीय है। राम को आदर्श राजा माना जाता है और यह पर्व धर्म एवं भक्ति की प्रेरणा देता है।
जन्माष्टमी (भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव)
यह श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। कृष्ण के उपदेश, रासलीला और गोकुलवासियों के रक्षक रूप के स्मरण के साथ भक्त व्रत, भजन-कीर्तन करते हैं।
रक्षा बंधन (भाई-बहन का बंधन)
बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह राखी शुभकामनाओं का प्रतीक है, जहाँ बहन भाई की दीर्घायु हेतु प्रार्थना करती है।
महा शिवरात्रि (शिव व्रत)
फाल्गुन मास की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है। यह शिव और पार्वती के विवाह की रात मानी जाती है, साथ ही अंधकार पर ज्ञान की जीत का पर्व भी है। भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात में शिवजी का अभिषेक एवं जाप करते हैं।
गणेश चतुर्थी (गणपति उत्सव)
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि-देवता माना जाता है, इसलिए उनके साथ आरंभ में पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन बड़े-बड़े गणपति मूर्तियों की स्थापना और विग्रह विसर्जन की रीति होती है।
मकर संक्रांति
यह कृषि एवं सांस्कृतिक पर्व है जो उत्तरायण (सूर्य के मकर राशि में प्रवेश) के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। यह फसल कटाई के बाद उत्सव का समय है; लोग पतंग उड़ाते, खिचड़ी/पोंगल पकाते और परिवार-संग मेले लगते हैं।
वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा)
बसंत ऋतु के आगमन पर वसंत पंचमी पड़ती है। यह विद्या और संगीत की देवी सरस्वती को समर्पित है। पीले रंग के वस्त्र पहनकर पीले फूल अर्पित किए जाते हैं, और नव-वसंत का स्वागत होता है।
तीज (पार्वती-शिव प्रेम)
श्रावण माह की तीज व्रत में माँ पार्वती और भोलेनाथ के परम प्रेम की स्मृति मनाई जाती है। विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पार्वती के स्तोत्र पढ़ती हैं।
करवा चौथ (पत्नी का व्रत)
श्रावण माह की चतुर्थी को विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु हेतु निर्जल व्रत रखती हैं। इसकी पौराणिक कथा में सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के जीवन की प्रार्थना की थी, जिसके चलते यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवित कर दिया।
छठ पूजा (सूर्य वंदना)
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को छठ मनाया जाता है। यह पूर्वोत्तर भारत और नेपाल में प्रसिद्ध है और सूर्य देव तथा छठी मैया को समर्पित है। सुबह-शाम नदी के घाटों पर खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हुए मनोकामनाएँ मांगी जाती हैं।
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट
दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण होता है। भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं और 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित करते हैं, यह प्रकृति के सम्मान तथा भक्ति की शक्ति का प्रतीक है।
हनुमान जयंती
चैत्र मास की पूर्णिमा या कार्तिक महीने में पड़ने वाली यह पर्व भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हनुमान जी को रामभक्ती एवं अद्भुत शक्ति के प्रतीक माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह शिक्षकों और आचार्यों को सम्मानित करने का पर्व है, विशेषकर वेदव्यास की जयंती भी मानी जाती है।
राष्ट्रीय पर्व (National Festivals - hindu mythology)
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)
1950 में संविधान लागू होने की वर्षगांठ पर मनाया जाता है, जो भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनाता है। इस दिन राजपथ पर भव्य परेड होती है और देश की सांस्कृतिक विविधता प्रदर्शित की जाती है।
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)
1947 में ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह आज़ादी की प्राप्ति का उत्सव है। तिरंगा फहराया जाता है और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
गांधी जयंती (2 अक्टूबर)
महात्मा गांधी की जन्मतिथि पर अहिंसा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को याद करने एवं शांति का संदेश फैलाने के लिए समर्पित है।
संविधान दिवस (26 नवम्बर)
26 नवंबर 1949 को संविधान स्वीकार किए जाने की वर्षगांठ पर मनाया जाता है। यह भारतीय संविधान के आदर्शों (न्याय, आज़ादी, समानता, बंधुत्व) का सम्मान करने का पर्व है।
शहीद दिवस (30 जनवरी)
30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिवस स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को नमन करने एवं देशभक्ति की भावना जागृत करने का दिन है।
क्षेत्रीय त्योहार (Regional Festivals - hindu mythology)
बिहू (असम)
असम का प्रमुख उत्सव, जिसमें वसंत बिहू (रँगाली बिहू) वसंत ऋतु और नववर्ष का स्वागत करता है। कर्ण बिहू (कटि बिहू) में फसलों की सुरक्षा की पूजा होती है और माघ बिहू (भोगाली बिहू) कटाई का उत्सव है। सभी असमिया (धर्म-जाति से परे) आनंदपूर्वक मिलकर गीत-नृत्य करते हैं।
पोंगल (तमिलनाडु)
तमिल समुदाय का प्रमुख कृषि उत्सव है। चार दिनों तक मनाया जाने वाला यह त्यौहार सूर्य देवता, प्रकृति और खेतिहर पशुओं को धन्यवाद देने के लिए होता है। इस दौरान मिट्टी के बर्तनों में मीठा चावल (पोंगल) पकाकर सूर्य को अर्पित किया जाता है।
ओणम (केरल)
केरल का राष्ट्रीय पर्व, चिंगम महीने में दस दिन तक मनाया जाता है। मान्यता है कि असुर राजा महाबली की आत्मा इस दौरान अपने प्रजाजन से मिलने आती है। ओणम में अद्भुत पुष्पलताओं (अथापूकोलम), नौका दौड़, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विशाल साद्या (भोजन) के माध्यम से वसंत ऋतु और समृद्धि का स्वागत किया जाता है।
बैसाखी (पंजाब एवं उत्तरी भारत)
वैशाख महीने का प्रथम दिन फसल कटाई और नई साल के रूप में मनाया जाता है। पंजाब में सिखों के लिए ख़ालसा पंथ की स्थापना (1699) का भी पर्व है। इस दिन गुरु का नामजप, उपवास तोड़ना, और लोग एक-दूसरे को नई शुरुआत की बधाई देते हैं।
लोहड़ी (पंजाब और उत्तर भारत)
मकर संक्रांति की पूर्व संध्या (१३-१४ जनवरी) को लोहड़ी पर्व होता है। यह सर्दियों के अंत और दिन बढ़ने की सूचना देता है। डुल्ला भट्टी की लोककथा और रबी फसल की कटाई के प्रतीक के रूप में अलाव जलाकर, सरसों के साग-मक्की की रोटी खाकर उत्सव मनाते हैं।
उगादी/गुड़ी पड़वा (कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र, महाराष्ट्र)
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला नववर्ष है। आंध्र एवं कर्नाटक में ‘उगादी’ तथा महाराष्ट्र में ‘गुड़ी पड़वा’ नाम से, यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। घर को गुड़ व आम के फूल से सजाते हैं और नए साल की मंगलकामनाएँ साझा करते हैं।
नुआखाई (ओडिशा)
पश्चिमी ओडिशा में मनाया जाने वाला प्रमुख कृषि उत्सव है। इसका अर्थ है “नई खाना” अर्थात् इस दिन फसलों की पहली धान की पूजा की जाती है। गाएँ संदीप की पूजा कर नई फसल का स्वागत करते हैं और देवताओं को भेंट चढ़ाते हैं।
नागपंचमी
श्रावण माह की पंचमी को नागदेवताओं की पूजा होती है। इस दिन सांपों के चित्र या मूर्तियों को दूध और फूल चढ़ाकर माँगा जाता है कि घर-परिवार सुरक्षित रहे। पुराणों के अनुसार इस दिन सांपपूजन से विष के दोष दूर होते हैं।
हेमिस उत्सव (लद्दाख)
यह लद्दाख के बौद्ध मठ (हेमिस मठ) में जून में मनाया जाने वाला महोत्सव है। इसमें गुरु पद्मसम्भव के जन्मोत्सव की पूजा होती है। रंग-बिरंगी मुखौटों वाले तिब्बती नृत्य (चाम डांस) और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लद्दाख की सांस्कृतिक धरोहर का जश्न मनाया जाता है।
फूलदेई (उत्तराखंड)
उत्तराखंड (गढ़वाल-कुमाऊँ) में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मनाया जाने वाला लोक पर्व है। यह वसंत ऋतु और आगामी फसल हेतु प्रार्थना का उत्सव है। युवा लड़कियाँ एकत्र हो कर फूल और चावल चपाती छिड़कती हैं, और पारंपरिक गीत गाकर गांव-टाउन में फूलों का स्वागत करती हैं।
खजुराहो नृत्य महोत्सव (मध्य प्रदेश)
फरवरी में आयोजित यह एक सप्ताह का महोत्सव है, जिसमें भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी आदि भारतीय शास्त्रीय नृत्य कला के श्रेष्ठ कलाकार प्रस्तुति देते हैं। खूबसूरत खजुराहो मंदिरों के प्रांगण में खुले आसमान के नीचे यह महोत्सव भारत की समृद्ध नृत्य परंपरा को दर्शाता है।
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