महाशिवरात्रि 2026: इस बार क्या है खास? जानें तिथि, शुभ संयोग और अद्भुत इतिहास

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1) महाशिवरात्रि 2026: इस बार क्या है खास? जानें तिथि, शुभ संयोग और अद्भुत इतिहास

हिंदू धर्म के सबसे बड़े और पवित्र त्योहारों में से एक महाशिवरात्रि साल 2026 में बेहद खास होने जा रही है। भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का यह पर्व इस बार न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भी अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है।

1. तिथि और शुभ मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Date & Muhurat)

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026, रविवार को पड़ रही है। हालांकि चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी की शाम तक रहेगी, लेकिन महाशिवरात्रि का पर्व उस दिन मनाया जाता है जब चतुर्दशी रात्रि (निशिता काल) में विद्यमान हो।

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे से।
  • निशिता काल पूजा समय: 16 फरवरी, रात्रि 12:09 से 01:01 बजे तक।
  • व्रत पारण समय: 16 फरवरी, सुबह 07:00 बजे से दोपहर 03:24 बजे के बीच।

2. इस बार क्यों है खास? (What's Special in 2026)

साल 2026 की महाशिवरात्रि पर ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में की गई पूजा और नई शुरुआत का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा:

  • शुक्रादित्य योग: इस दिन सूर्य और शुक्र की युति कुंभ राशि में होगी, जिससे शुक्रादित्य योग का निर्माण हो रहा है। यह योग करियर और आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। 

(Source: अमर उजाला)

  • रविवार का संयोग: भगवान शिव को ‘सूर्य’ का कारक भी माना जाता है, और रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। रविवार को महाशिवरात्रि होने से यह “ऊर्जा और आरोग्यता” का वरदान देने वाली मानी जा रही है। (Source  Drik Panchang)

3. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का ऐतिहासिक दर्शन

आर्ट ऑफ लिविंग (बेंगलुरु आश्रम) से जुड़ी खबरों के अनुसार, इस महाशिवरात्रि पर 1000 साल पुराने मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का विशेष अवसर भी भक्तों को मिल सकता है, जो ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत बड़ा समाचार है। Source:  Art of Living

4. चार प्रहर की पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहरों में अभिषेक करने का विधान है। मान्यता है कि जो भक्त चारों प्रहर की पूजा करते हैं, उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है:

  1. प्रथम प्रहर: शाम 06:11 से रात 09:23 तक।
  2. द्वितीय प्रहर: रात 09:23 से 16 फरवरी रात 12:35 तक।
  3. तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 से 03:47 तक।
  4. चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 03:47 से 06:59 तक।

निष्कर्ष: 

2026 की महाशिवरात्रि आध्यात्मिक जागृति और ज्योतिषीय लाभ का एक अनूठा संगम है। शिवभक्तों के लिए यह रात्रि केवल जागरण की नहीं, बल्कि ‘शिवत्व’ को अपने भीतर उतारने का स्वर्णिम अवसर है।

क्या आप इस महाशिवरात्रि के लिए विशेष व्रत विधि या पूजन सामग्री की सूची जानना चाहेंगे?

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