जटोली शिव मंदिर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित है। यह सोलन शहर से लगभग 7 किमी दूर है और भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि यह स्थान कभी भगवान शिव का विश्राम स्थल रहा था। जटोली नाम भगवान शिव की लंबी जटाओं (बालों) से पड़ा है।1950 के दशक में सिद्ध संत स्वामी श्री कृष्णानंद परमहंस यहां आए। इस स्थान की दिव्य ऊर्जा से प्रभावित होकर उन्होंने यहीं तपस्या शुरू की। वे एक गुफा में ध्यान करते थे, जो आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है। स्वामी जी के मार्गदर्शन में ही मंदिर निर्माण की योजना बनी और 1974 में उन्होंने मंदिर की नींव रखी।मंदिर का निर्माण लगभग 39 वर्षों तक चला। 10 जुलाई 1983 को स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने समाधि ली। इसके बाद मंदिर प्रबंधन समिति ने निर्माण कार्य जारी रखा और अंततः 2013 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ, जब इसे अपना वर्तमान स्वरूप मिला।

मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसका ऊंचा और भव्य शिखर है। यह शिखर तीन पिरामिडनुमा स्तरों में बना है, जो ऊपर की ओर जाते-जाते छोटे होते जाते हैं। इसका पहला स्तर सबसे चौड़ा है, जिस पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, फूलों और ज्यामितीय डिजाइनों की सुंदर नक्काशी की गई है। दूसरा स्तर थोड़ा संकरा है, जिसमें अप्सराओं और गंधर्वों जैसी दिव्य आकृतियां उकेरी गई हैं। तीसरा और अंतिम स्तर सबसे ऊपर स्थित है, जहां कमल के फूल और अन्य प्रतीकात्मक आकृतियां बनाई गई हैं, जो पवित्रता और ज्ञान का संकेत देती हैं। शिखर के शीर्ष पर अमलक स्थापित है और उसके ऊपर सुनहरा कलश रखा गया है। मंदिर का शिखर लगभग 111 फीट ऊंचा है और कलश को मिलाकर इसकी कुल ऊंचाई लगभग 122 फीट तक पहुंचती है।
जटोली शिव मंदिर: जहां स्फटिक का पवित्र शिवलिंग विराजमान है

जटोली शिव मंदिर में स्फटिक का शिवलिंग स्थापित है। स्फटिक को शास्त्रों में सकारात्मक ऊर्जा का सबसे शुद्ध स्रोत माना जाता है। यह सूर्य की किरणों को सबसे पहले आकर्षित करता है और उन्हें चारों ओर फैलाता है, जिससे मंदिर में विशेष दिव्यता और ऊर्जा का अनुभव होता है। इस शिवलिंग पर चांदी की जलहरी लगी है और यह देखने में अत्यंत सुंदर लगता है।
जटोली शिव मंदिर: जहां पत्थरों से निकलती है डमरू जैसी आवाज
जटोली शिव मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किए गए विशाल पत्थरों में एक अद्भुत रहस्य छिपा है। जब इन्हें हल्के से थपथपाया या दस्तक दी जाती है, तो यह डमरू जैसी स्पष्ट और गूंजती हुई आवाज निकालते हैं। यह आवाज बिल्कुल वैसी ही है जैसी भगवान शिव के डमरू से आती है, जिससे भक्तों को मंदिर में एक लयबद्ध और रहस्यमयी अनुभव होता है।
जटोली मंदिर की पवित्र गुफा: स्वामी कृष्णानंद की तपोस्थली

मंदिर की सबसे विशेष और रहस्यमयी जगह इसकी गुफा है। यह गुफा मंदिर परिसर के एक कोने में स्थित है और प्राचीन हिमालयी तपोस्थलों की याद दिलाती है, जहाँ संत और साधक तपस्या किया करते थे। स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने इसी गुफा में कई वर्षों तक एकांत में रहकर गहन तपस्या, ध्यान और साधना की।
स्वामी जी की समाधि वर्ष 1983 में हुई, लेकिन श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा आज भी इस गुफा में महसूस की जा सकती है। गुफा के भीतर स्वामी जी की ध्यान-गद्दी (आसन), चप्पलें, फोटो और अन्य निजी वस्तुएँ सुरक्षित रखी गई हैं। यहाँ एक छोटा सा शिवलिंग भी स्थापित है।
आज भी भक्त और साधक इस गुफा में ध्यान करने आते हैं। कई लोगों का कहना है कि यहाँ उन्हें गहरी शांति, आंतरिक ऊर्जा और भगवान शिव की दिव्य अनुभूति होती है।
जटोली शिव मंदिर का चमत्कारी जल कुंड: त्रिशूल प्रहार से निकला औषधीय जल

मंदिर परिसर के उत्तर-पूर्वी कोने में स्थित जल कुंड एक अत्यंत पवित्र जलाशय माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसकी पवित्रता गंगा जल के समान है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जाटोली क्षेत्र में पानी की भारी कमी थी। इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव कृपा प्रकट हुई और स्वामी जी ने त्रिशूल से भूमि पर प्रहार किया, जिससे जल की धारा फूट पड़ी।
तभी से यह जल कुंड निरंतर जल से भरा रहता है और आज तक जाटोली क्षेत्र में जल की कोई समस्या नहीं आई। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड का जल पीने से कई गंभीर रोगों में लाभ मिलता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस पवित्र जल में ऐसे औषधीय गुण मौजूद हैं, जो विशेष रूप से त्वचा रोगों के उपचार में सहायक माने जाते हैं।
जटोली शिव मंदिर कैसे पहुंचें
जटोली शिव मंदिर सोलन जिले में है और सोलन शहर से मात्र 7-8 किमी दूर राजगढ़ रोड पर स्थित है। यह चंडीगढ़ से करीब 72 किमी और शिमला से लगभग 53 किमी दूर है। मोहाली/चंडीगढ़ या शिमला से आने के लिए सुविधाजनक है।
सड़क मार्ग से (By Road):
- चंडीगढ़/मोहाली से: NH5 (चंडीगढ़-शिमला हाईवे) से सोलन पहुंचें (1.5-2 घंटे)। सोलन से राजगढ़ रोड पर 7-8 किमी आगे। लोकल बस, टैक्सी या अपनी कार से आसानी से। मंदिर में फ्री पार्किंग है।
- शिमला से: NH5 से नीचे की ओर सोलन (1-1.5 घंटे)। सोलन से आगे 7-8 किमी। रास्ता सुंदर और घुमावदार है।
- अंतिम हिस्सा में 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ सकती हैं, लेकिन वाहन से सीधे ऊपर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से (By Train):
- निकटतम कालका रेलवे स्टेशन (45-50 किमी)। यहां से सोलन तक बस/टैक्सी (1-1.5 घंटे)।
- कालका-शिमला टॉय ट्रेन से सोलन आ सकते हैं (सुंदर सफर)।
हवाई मार्ग से (By Air):
- निकटतम चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट (55-65 किमी) टैक्सी/बस से सोलन 2-3 घंटे।
- शिमला एयरपोर्ट (जब्बर हट्टी) करीब 57 किमी दूर, लेकिन चंडीगढ़ ज्यादा कनेक्टेड है।
जटोली शिव मंदिर के पास स्थित प्रमुख तीर्थ स्थल:
- शूलिनी देवी मंदिर
- मोहन शक्ति हेरिटेज पार्क
- काली का टिब्बा – Chail
- लुटरू महादेव मंदिर
जटोली शिव मंदिर FAQs
1. जटोली शिव मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है, जिसकी भव्य वास्तुकला और दिव्य ऊर्जा के कारण प्रसिद्ध है।
2. जटोली शिव मंदिर की विशेषता क्या है?
स्फटिक शिवलिंग, डमरू जैसी पत्थरों की आवाज, स्वामी कृष्णानंद की पवित्र गुफा और चमत्कारी जल कुंड इसकी मुख्य विशेषताएं हैं।
3. जटोली मंदिर की ऊँचाई कितनी है?
शिखर 111 फीट और कलश सहित कुल ऊंचाई 122 फीट है, जो इसे एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर बनाती है।
4. जटोली शिव मंदिर कैसे पहुंचें?
सोलन से 7-8 किमी दूर; चंडीगढ़/मोहाली से NH5 via सोलन (1.5-2 घंटे), शिमला से 53 किमी (1-1.5 घंटे)।
5. जटोली शिव मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक (कुछ स्रोतों में 5 AM से 10 PM तक); महाशिवरात्रि पर विशेष समय।




