बिजली महादेव: गूरवाणी का संदेश, रोपवे निर्माण से महादेव अप्रसन्न
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित बिजली महादेव एक अत्यंत प्रसिद्ध और रहस्यमय तीर्थ स्थल है। यह पवित्र मंदिर हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो यहां महादेव के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।
इस मंदिर की सबसे विशेष और चमत्कारिक बात यह है कि यहां हर 12 साल बाद शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से बिजली गिरती है। जब बिजली गिरती है, तो शिवलिंग टूट जाता है। इसके बाद स्थानीय लोग बड़ी श्रद्धा और विशेष विधि-विधान के साथ इस शिवलिंग को मक्खन से जोड़ते हैं। यही अनोखी परंपरा इस पवित्र स्थल को देखने के लिए दूर-दूर से लोगों को आकर्षित करती है।हिंदू पुराणों और मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है। इसी कारण सावन के महीने में बिजली महादेव मंदिर में विशेष रूप से अधिक भीड़ रहती है। श्रद्धालु इस पावन महीने में यहां आकर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
सामान्यतः बिजली महादेव मंदिर सर्दियों के मौसम में दिसंबर की संक्रांति के दिन बंद हो जाता है। इसके बाद महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर के कपाट पुनः खुलते हैं।
हालांकि, 2025 के सावन महीने में मंदिर के कपाट बंद रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यहां चल रहे रोपवे निर्माण कार्य हैं।
यह रोपवे परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पर्वतमाला योजना का हिस्सा है, जिसकी घोषणा वर्ष 2021 में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को सुविधाजनक बनाना और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देना है।
2024 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी ने इस परियोजना का भूमि पूजन किया। भूमि पूजन के बाद पिर्डी बेस स्टेशन पर निर्माण सामग्री पहुंचाई गई और कार्य प्रारंभ हुआ। हालांकि, जुलाई 2025 तक काम जारी है।
कहाँ बनाया जा रहा है रोपवे?
बिजली महादेव मंदिर कुल्लू शहर से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्तमान में इस पवित्र स्थल तक पहुंचने का एकमात्र साधन पैदल यात्रा है। किंजा ग्राम से शुरू होने वाला यह पदयात्रा मार्ग तीन घंटे की चढ़ाई के बाद मंदिर तक पहुंचता है।
यह रोपवे नेचर पार्क (मोहाल) से प्रारंभ होकर मंदिर से 900 मीटर नीचे तक का सफर तय करेगा। इस 2.5 किलोमीटर लंबे रोपवे से तीन घंटे की कठिन यात्रा मात्र सात मिनट में पूरी हो जाएगी।
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परियोजना की विशेषताएं
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- दैनिक क्षमता: प्रतिदिन 36,000 श्रद्धालुओं की सुविधा
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- मौसम रहित कनेक्टिविटी: वर्षभर निरंतर यातायात की व्यवस्था
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- वित्तीय आवंटन: केंद्र सरकार द्वारा 226 करोड़ रुपये का अनुमोदन
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- स्वामित्व: परियोजना में केंद्र सरकार की पूर्ण भागीदारी
राजनीतिक पहलू
यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के ड्रिम प्रोजेक्ट का हिस्सा है और उनकी प्राथमिकता में शामिल है। हालांकि, कंगना रनौत ने इस योजना के विरुद्ध आपत्ति व्यक्त की थी। फिर भी, केंद्र सरकार इस विकास कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बिजली महादेव का संदेश: रोपवे निर्माण से महादेव रुष्ट

बिजली महादेव ने अपने गुरु के माध्यम से यहां हो रहे रोपवे निर्माण को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस दिव्य संदेश के कारण ही सावन महीने में भी मंदिर के कपाट बंद रखे गए हैं।स्थानीय भक्तों को दिए गए स्वप्न संदेशयहां के स्थानीय भक्तों और निवासियों को महादेव ने स्वप्न में दर्शन देकर रोपवे के निर्माण कार्य को लेकर मना किया है। इन दिव्य स्वप्नों में भगवान शिव ने अपनी स्पष्ट नाराजगी प्रकट की है।महादेव के आदेश का पालनश्रद्धालुओं और स्थानीय समुदाय ने महादेव के इस दिव्य संदेश को गंभीरता से लिया है। भगवान शिव की इच्छा के अनुसार, उन्होंने रोपवे परियोजना के विरोध में अपना स्थान लिया है।
मंदिर के पास की भूमि में दरारें उभरीं
हाल ही में बिजली महादेव मंदिर के आसपास की पवित्र भूमि में गहरी दरारें दिखाई दी हैं। ये दरारें अचानक प्रकट हुई हैं और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। श्रद्धालुओं और निवासियों का दृढ़ विश्वास है कि यह दरारें महादेव की नाराजगी का स्पष्ट संकेत हैं और इन्हें भगवान द्वारा दिया गया चेतावनी संदेश माना जा रहा है। स्थानीय समुदाय का कहना है कि 1988 में भी जब मंदिर परिसर में हेलीपैड बनाने का प्रयास किया गया था, तब त्रासदी हुई थी। अब रोपवे निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन स्थानीय लोग दृढ़ संकल्प के साथ कह रहे हैं कि किसी भी स्थिति में वे इसे बनने नहीं देंगे।
स्थानीय लोगों का विरोध
रोपवे निर्माण के खिलाफ सबसे बड़ी आवाज़ स्थानीय महिलाओं ने उठाई है। बड़ी संख्या में महिलाएँ डीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित हुईं और उन्होंने रोपवे परियोजना को तुरंत बंद करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने अपने हाथों में तख्तियां और पोस्टर उठाए हुए थे, जिन पर साफ-साफ लिखा था:
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- “रोपवे बंद करो”
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- “हर हर महादेव”
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- “रोपवे कंपनी गो बैक”
इसके बावजूद रोपवे निर्माण के लिए कंपनी को बाकायदा टेंडर दे दिया गया और परियोजना के दायरे में आने वाले पेड़ों का कटान भी शुरू कर दिया गया। अब तक लगभग 203 पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनकी लकड़ियाँ अभी भी वहीं पड़ी हैं। ग्रामीणों ने साफ मना कर दिया है कि इन लकड़ियों को बाहर नहीं ले जाने देंगे।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संघर्ष केवल पर्यावरण बचाने का ही नहीं, बल्कि महादेव की पवित्र धरा को संरक्षित करने का भी है। लोगों का विश्वास है कि जहाँ महादेव विराजमान हों, वहाँ कृत्रिम विकास परियोजनाएँ नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था का संरक्षण होना चाहिए। यही कारण है कि हर उम्र और हर वर्ग के लोग इस आंदोलन में एकजुट होकर खड़े हैं।
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