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विरासत (Heritage) वह सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारंपरिक या प्राकृतिक धरोहर है, जो हमें हमारे पूर्वजों से प्राप्त हुई है और जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करते हैं।
परिचय
विरासत (Heritage) वह सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पारंपरिक या प्राकृतिक धरोहर है, जो हमें हमारे पूर्वजों से प्राप्त हुई है और जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करते हैं। इसमें हमारे प्राचीन मंदिर, किले, स्मारक, पुरातात्विक स्थल, कला, संगीत, भाषा, रीति-रिवाज़, और प्राकृतिक सौंदर्य सभी शामिल हैं। यह न केवल हमारी पहचान का प्रतीक है, बल्कि हमारे अतीत से जुड़ने का माध्यम भी है, जो हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारी सभ्यता ने किन-किन चरणों से होकर विकास किया है।
हिंदू माइथोलॉजी के अनुसार, विरासत केवल भौतिक धरोहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक मान्यताएँ, पुराणों में वर्णित कथाएँ, तीर्थस्थल और देवी-देवताओं से जुड़ी पवित्र परंपराएँ भी सम्मिलित हैं। जैसे वाराणसी, द्वारका, बद्रीनाथ, केदारनाथ और रामेश्वरम जैसे तीर्थ, महाभारत और रामायण में वर्णित पवित्र स्थलों की तरह आज भी हमारी सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत हिस्सा हैं। इन स्थलों और मान्यताओं को संजोना न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि यह हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भविष्य तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी भी है।
विरासत के प्रकार (Types of Heritage)
1. सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage)
- भाषा, नृत्य, संगीत, धर्म, त्योहार, परंपराएं
- उदाहरण: कुम्भ मेला, भरतनाट्यम, रामलीला
2. ऐतिहासिक विरासत (Historical Heritage)
- प्राचीन भवन, किले, मंदिर, स्मारक, पांडुलिपियाँ
- उदाहरण: ताजमहल, लाल किला, नालंदा विश्वविद्यालय
3. प्राकृतिक विरासत (Natural Heritage):
- नदियाँ, पर्वत, वन, झीलें जो प्रकृति की धरोहर हैं
- उदाहरण: हिमालय, गंगा नदी, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
4. अमूर्त विरासत (Intangible Heritage):
- विचार, ज्ञान, लोककथाएँ, रीति-रिवाज
- उदाहरण: वेद, योग, आयुर्वेद, नमस्कार की परंपरा
हिंदू माइथोलॉजी और विरासत (Heritage in Hindu Mythology):
1. महाकाव्य और ग्रंथ:
- रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, पुराण — ये केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक धरोहर भी हैं।
2. तीर्थयात्रा परंपरा:
- चारधाम, सप्तपुरी, बारह ज्योतिर्लिंग, अमरनाथ यात्रा — ये तीर्थ धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं।
3. धार्मिक प्रतीक और चिन्ह:
- ओम्, स्वस्तिक, त्रिशूल, शंख, कमल — ये प्रतीक हमारी कला, वास्तुकला और धार्मिक अनुष्ठानों में गहराई से जुड़े हैं।
4. मंदिर वास्तुकला:
- खजुराहो, कोणार्क, मीनाक्षी मंदिर — ये प्राचीन मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की विरासत भी हैं।
5. गुरु-शिष्य परंपरा और संस्कार:
- शिक्षा और जीवन मूल्यों की परंपरा गुरु-शिष्य संबंधों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आई है।
6. लोककलाएं और शिल्प:
- मिथिला पेंटिंग, वारली आर्ट जैसी कलाएं धार्मिक कथाओं और देवी-देवताओं से जुड़ी हुई हैं और जीवित विरासत को दर्शाती हैं।
7. योग और ध्यान:
- योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी साधनाएं केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा हैं।
8. चिह्न और अमूर्त मूल्य:
- नमस्कार की परंपरा, व्रत, उपवास, पंचांग — ये सभी जीवनशैली का वह हिस्सा हैं जो हिंदू माइथोलॉजी से गहराई से जुड़ा है।
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